Friday, July 25, 2025

ग्रीनिंग ऑफ एमएसएमईज़’ के तहत स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन कार्यशाला का आयोजन

 Received From AT//PR on 26th July 2025 at 1:05 PM Regarding Industrial Growth Workshop 

कार्यशाला में  बद्दी और नालागढ़ के उद्योग प्रतिनिधियों ने लिया भाग

*2500 से अधिक उद्यमों को ऊर्जा दक्षता 

*अपशिष्ट प्रबंधन और हरित वित्तपोषण  पर विशेष प्रशिक्षण की योजना

*शिमला से एक नई औद्योगिक तेज़ी की शुरुआत 


शिमला
: 25 जुलाई 2025: (कार्तिका कल्याणी सिंह/ / देवभूमि स्क्रीन डेस्क):: 

प्रयवरण को सुरक्षित रखते हुए उद्योग को विकास की राह पर तेज़ रफ्तारी देना आसान नहीं होता। इस कोशिश में बहुत सी चुनौतियां भी रहती हैं। इन चुनौतियों से निपटने और इन पर चर्चा करने के लिए एक विशेष कार्यशाला का आयोजन करवाया गया जो पूरी तरह से सफल भी रहा। 

पर्यावरण अनुकूल औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने और एमएसएमई इकाइयों को टिकाऊ एवं संसाधन दक्ष बनाने की दिशा में ‘ग्रीनिंग ऑफ एमएसएमईज़’ योजना के अंतर्गत  सोलन में एक स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में सोलन जिला के बद्दी, नालागढ़ जैसे औद्योगिक क्षेत्रों के उद्यमियों और उद्योग प्रतिनिधियों ने भाग लेकर सक्रिय सहभागिता निभाई।

इस कार्यशाला का आयोजन फ्रॉस्ट एंड सुलिवन एवं टिंज कंसल्टेंसी द्वारा संयुक्त रूप से किया गया, जिसमें प्रतिभागियों को ऊर्जा संरक्षण, अपशिष्ट प्रबंधन, हरित वित्तपोषण, जल संरक्षण एवं पुनर्चक्रण, तथा रिसोर्स एफिशिएंसी जैसे विषयों पर विस्तार से जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने ‘रिसोर्स एफिशिएंट क्लीनर प्रोडक्शन (RECP)’ की अवधारणा को रेखांकित करते हुए बताया कि किस प्रकार एमएसएमई इकाइयां कम संसाधनों के साथ अधिक उत्पादन कर सकती हैं और साथ ही पर्यावरणीय दायित्व भी निभा सकती हैं।

‘ग्रीनिंग ऑफ एमएसएमईज़’ योजना भारत सरकार के RAMP (Raising and Accelerating MSME Performance) कार्यक्रम के तहत चलाई जा रही है, जिसे विश्व बैंक का सहयोग प्राप्त है। इसका उद्देश्य देश के एमएसएमई सेक्टर को तकनीकी और वित्तीय रूप से सशक्त बनाकर उन्हें अधिक प्रतिस्पर्धी एवं पर्यावरण हितैषी बनाना है। इस परियोजना के तहत राज्य में लगभग 1900 एमएसएमई इकाइयों को ग्रीनिंग प्रक्रिया से जोड़ा जाएगा।

कार्यशाला में प्रतिभागियों को, नेट जीरो, ईसजी, सर्कुलर   इकोनॉमी, डिकार्बनाइजेशन जैसे आधुनिक औद्योगिक अवधारणाओं से भी अवगत कराया गया। इसके अतिरिक्त, ग्रीन फाइनेंसिंग हेतु उपलब्ध योजनाओं, तकनीकी समाधान प्रदाताओं से संपर्क और डिजिटल पोर्टल के माध्यम से रियल टाइम निगरानी व्यवस्था पर भी जानकारी साझा की गई।

इसमें जानकारी दी गई कि आने वाले समय में राज्य के 2500 से अधिक उद्यमों को ऊर्जा दक्षता, अपशिष्ट प्रबंधन और हरित वित्तपोषण जैसे विषयों पर विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह पहल हिमाचल प्रदेश सरकार की 2026 तक राज्य को ‘ग्रीन एनर्जी स्टेट’ बनाने की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है और भारत सरकार के वर्ष 2070 तक नेट ज़ीरो लक्ष्य को साकार करने में राज्य के योगदान को दर्शाती है। यह कार्यशाला न केवल ज्ञानवर्धक रही, बल्कि इसमें भाग लेने वाले उद्यमियों को अपनी इकाइयों के लिए व्यावहारिक समाधान और वित्तीय संसाधनों की दिशा में मार्गदर्शन भी प्राप्त हुआ। 

उद्योग विभाग के अतिरिक्त निदेशक तिलकराज शर्मा ने कहा कि ‘ग्रीनिंग ऑफ एमएसएमईज़’ केवल पर्यावरणीय पहल नहीं, बल्कि यह औद्योगिक मानसिकता में सकारात्मक बदलाव का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इससे न केवल पर्यावरण को संरक्षण मिलेगा, बल्कि एमएसएमई इकाइयां अधिक आत्मनिर्भर, प्रतिस्पर्धी और लाभकारी बनेंगी।

Monday, June 2, 2025

हिमाचल के युवा वन अधिकारी देवेन्द्र चौहान की पुस्तक का विमोचन

Emailed on Monday 2nd June 2025 at 7:03 PM Regarding Book Release By Chief Minister 

पुस्तक का विमोचन किया मुख्यमंत्री ने


शिमला
: 2 जून 2025: (देवभूमि स्क्रीन डेस्क)::

हिमाचल सचमुच देवभूमि की तरह ही तो है। इस पावन पवित्र स्थान के दर्शन सभी को तो नहीं होते। इस राज्य के शुद्ध जल और शुद्ध हवा के लिए अच्छे नसीबों की ज़रूरत होती है। यहाँ के प्रकृति दृश्य देखें तो इंसान देखता ही रह जाता है। जब उसके हाथ में कलम या पेंटिंग वाला बी रश हो तो एक नया जादू सा छा  जाता है। जब जानेमाने लेखक देवेंद्र सिंह चौहान यहांलाहौल स्पीति में रहे तो उनकी कलम ने बहुत कुछ रचा। उन्हीं रचनाओं का संकलन है यह पुस्तक।  

हिमाचल प्रदेश के युवा अधिकारी दवेंद्र सिंह चौहान की पुस्तक ‘ The Mountainous wilderness of Spiti a Hidden world“  का आज हमीरपुर में हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने विमोचन किया।  आयोजन यादगारी रहा।  देवेन्द्र चौहान ने लाहुल स्पीती में अपने स्वाकाल के दौरान लाहुल के जीवन के हर पहलू को इस पुस्तक में समेटा है। महामहिम दलाई लामा ने इस पुस्तक की प्रशंसा करते हुए इसे एक बेहतरीन पुस्तक बताया है। 

एक बात और 326 पृष्ठों की इस पुस्तक में लाहुल स्पीती के अनेक मनमोहक चित्रों के साथ वहां के जन-जीवन के महत्वपूर्ण पहलुओं को उकेरा गया है। स्पीती में रहने वाले पशु-पक्षियों सहित वहां की शान कहे जाने वाले बर्फानी तेंदुए तक के उल्लेखों से पुस्तक एक महत्वपूर्ण दसतावेज़ बन गयी है। यह किताब इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि इसका लेखक एक युवा वन अधिकारी है और इस अधिकारी ने लाहुल स्पीती के ऊंचे-ऊचे पहाड़ों तक स्वयं पहुच कर वहां की कठिनायों को खुद जिया है। देवेन्द्र सिंह चौहान हिमाचल प्रदेश के चौपाल से समब्ध रखने वाले वन अधिकारी हैं और वर्तमान में वन विभाग के पब्लिसिटी वन मंडल में कार्यरत हैं |


Friday, May 16, 2025

उप मुख्यमंत्री ने एचपीयू में आयोजित अभ्युदय 2025 में की शिरकत

 क्रमांक 32/05// शिमला> 16 मई, 2025//07:48 PM from DPRO//Shimla//HP University//Event//

युनिवर्सिटी के साथ जुड़े रहे लोगों की चर्चा भी बहुत सम्मान से हुई            

शिमला: 16 मई 2025: (इनपुट कार्तिका कल्याणी सिंह//देवभूमि स्क्रीन डेस्क)::

आज भी हिमाचल प्रदेश युनिवेर्सिटी में बहुत ही भावुकता भरी चहल पहल रही। आज दो दिवसीय सांस्कृतिक एवं साहित्यिक उत्सव "अभ्युदय 2025" के समापन समारोह में अतीत से जुड़ी यादों के सिलसिला सभी के ज़हन में बहता हुआ महसूस हुआ। 

आयोजन का विशेष आकर्षण रहे उप मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश मुकेश अग्निहोत्री ने आज हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय सभागार में विवि विधिक अध्ययन संस्थान (यूआईएलएस) एवालॉज द्वारा आयोजित दो दिवसीय सांस्कृतिक एवं साहित्यिक उत्सव "अभ्युदय 2025" के समापन समारोह में बतौर मुख्यातिथि शिरकत की।

उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि यूआईएलएस एक ऐसा संस्थान है जहां से हमारे भविष्य के अधिवक्ता, न्यायिक अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी एवं राजनेता निकलेंगे। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश विधानसभा में लगभग 12 से 14 विधायक इसी विश्वविद्यालय से निकले हैं। इस संस्थान से निकले छात्र आज हर क्षेत्र में सेवाएं प्रदान कर रहे हैं जो सभी के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि यहां के अध्यापकों की देश तथा प्रदेश में अपनी अलग पहचान है। उन्होंने विद्यार्थियों से सभी अध्यापकों का सम्मान एवं कड़ी मेहनत कर इस देश तथा प्रदेश को आगे ले जाने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा कि इस विश्वविद्यालय से हमारा गहरा संबंध रहा है। हमारी धर्मपत्नी स्वर्गीय प्रो सिम्मी अग्निहोत्री ने लगभग 28 वर्ष तक इस विश्वविद्यालय में सेवाएं दी है और अब बेटी डॉ आस्था अग्निहोत्री इस संस्थान में सेवाएं दे रही है।

यूआईएलएस कैंपस भवन के जीर्णोद्धार के लिए अधिकारियों के टीम करेगी विजिट

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि यूआईएलएस संस्थान का कैंपस मुख्यमंत्री का आवास भी रह चुका है। आज यहां बात सामने आई है कि कैंपस के भवन के हालात ठीक नहीं है जिसकी मरम्मत करने की आवश्यकता है। विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति ने भवन के लिए लगभग 5 करोड़ रुपए जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि जल्द ही यूआईएलएस संस्थान कैंपस भवन के जीर्णोद्धार के लिए अधिकारियों के टीम विजिट करेगी ताकि संस्थान के भवन की मरम्मत हो सके। उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास है कि संस्थान की हालत ठीक हो और इस संस्थान से छात्र आगे जाकर देश तथा प्रदेश का नाम रोशन करे।

प्रदेश सरकार की प्रतिबद्धता गरीब लोगों का विकास एवं कल्याण 

मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार की प्रतिबद्धता गरीब लोगों का विकास एवं कल्याण है और इस दिशा में यह सरकार आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि आज प्रदेश में हर क्षेत्र में शिक्षण संस्थान मौजूद हैं। प्रदेश में हर क्षेत्र में बहुत विकास हुआ है जिसके लिए उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री हिमाचल निर्माता यशवंत सिंह परमार एवं वीरभद्र सिंह को याद किया।

इस दौरान विश्वविद्यालय के छात्रों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए। 

न्यूजलेटर विधि वॉल्यूम 2 का किया विमोचन, विभिन्न गतिविधियों में विजेता रहे छात्रों को किया सम्मानित

उप मुख्यमंत्री ने दो दिवसीय कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए सभी को बधाई दी। उन्होंने कार्यक्रम के दौरान विभिन्न गतिविधियों में विजेता रहे छात्रों को सम्मानित भी किया। इसके अतिरिक्त, उन्होंने यूआईएलएस संस्थान के न्यूजलेटर विधि वॉल्यूम 2 का विमोचन भी किया।

विवि के प्रति कुलपति प्रो. राजिंद्र वर्मा ने विश्वविद्यालय के बारे में अपनी बात रखी तथा मुख्यातिथि का स्वागत किया।

निदेशक प्रो. शिव कुमार डोगरा ने यूआईएलएस संस्थान की गतिविधियों की जानकारी दी।

डॉ रितिका राणा ने 2 दिवसीय कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा रखी।

यह भी रहे उपस्थित

इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश कांग्रेस समिति के वरिष्ठ नेता महेश्वर सिंह चौहान, विनोद जिंटा, विवि की अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो ममता मोक्टा, कुलसचिव ज्ञान सागर नेगी, परीक्षा नियंत्रक प्रो श्याम लाल कौशल, प्रो. सुनील देष्टा सहित विवि के अधिष्ठाता और संस्थानों के निदेशकों और विभागाध्यक्ष सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

कुल मिलाकर यह एक यादगारी आयोजन रहा जिसने बहुत से लोगों के दिलों अतीत के तर झंकृत कर दिए। अतीत की यादों के साथ जब आज की चुनौतियों को रख कर देखा गया तो नै रहें और नई मंज़िलों की रंगीन तस्वीरें भी सामने आईं।  -०-

Sunday, January 19, 2025

हिमाचल के वाईल्ड लाईफ फोटोग्राफर प्रकाश बादल को मानद उपाधि

Emailed On 19th January 2025 at 5:22 PM

यूएस ए की यूनिवर्सिटी ने दिया मानद उपाधि का विशेष सम्मान 


शिमला19 जनवरी 2025: (मीडीया लिंक रविंद्र/ /देवभूमि स्क्रीन डेस्क)::

हिमाचल प्रदेश के वाईल्ड लाईफ फोटोग्राफर प्रकाश बादल को पत्रकारिता और वाईल्ड लाईफ फोटोग्राफी में महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए यू एस ए की सीडारब्रुक यूनिवर्सिटी ने पीएचडी की मानद उपाधि दे कर सम्मानित किया है | यह सम्मान समारोह दिल्ली में 18 जनवरी को प्रदान किया गया। 

प्रकाश बादल को  यह सम्मान पिछले लगभग 20 वर्षो से भी अधिक समय से निरंतर वाईल्ड लाईफ फोटोग्राफी और पत्रकारिता में अहम योगदान के आकलन के बाद मिला है। सीडारब्रुक यूनिवर्सिटी, द्वारा प्रकाश बादल को इस पुरस्कार के लिए चुने जाने हेतु लिखित पत्र के माध्यम से सूचित किया गया  और दिल्ली के होटल तिवोली में एक भव्य दीक्षांत समारोह में यह सम्मान दिया गया। 

गौरतलब है कि प्रकाश बादल हिमाचल प्रदेश के एकमात्र ऐसे फोटोग्राफर हैं, जिनकी तस्वीरों ने भारत ही नहीं, पूरे देश में अपने निजी संसाधनों से विभिन्न क्षेत्रों में जा जाकर पक्षियों के अद्भुत तस्वीरें खींचते हैं। बादल के द्वारा खींची गयी तस्वीरों ने विदेशों के मीडिया का भी ध्यान खींचा है, जिसके चलते पिछले वर्षों के दौरान अलग-अलग अंतरालों में प्रकाश बादल की तस्वीरें, ग्रेट ब्रिटेन के प्रमुख अखबार द सन, सहित देश विदेश के  अनेक प्रमुख समाचार पत्रों में उनकी तस्वीरें प्रकाशित होती आई हैं। 

इसके अतिरिक्त प्रकाश बादल की तस्वीरों को नेटजीयो ने अपने सोशल मीडिया हेंडल पर भी फीचर किया है। सूत्रों के अनुसार प्रकाश बादल अब तक भारत में विद्यमान लगभग 600 पक्षियों की बेहतरीन तस्वीरें खींच चुके हैं।  बादल हिमाचल प्रदेश के इकलौते ऐसे वाईल्ड लाईफ फोटोग्राफर है जो पक्षियों की तलाश में पूरे भारत में भ्रमण करते हैं और विभिन्न प्रजातियों के पक्षियों की बेहतरीन तस्वीरों को अपने कैमरे में कैद कर चुके हैं। 

कलकत्ता और बँगलादेश के अनेक चर्चित संगठनों ने प्रकाश की तस्वीरों को न केवल प्रदर्शनियों में स्थान दिया है, बल्कि उन्हें अनेक सम्मानों से सम्मानित भी किया गया है | पंजाब साहित्य कला अदाद्मी भी बादल को सम्मानित कर चुकी है। 

उत्तराखंड वन विभाग और स्ट्रेबो पिक्सल क्लब के संयुक्त तत्वाधान में नैनीताल में भी उन्हें सम्मानित किया जा चुका है। हिमाचल प्रदेश के पूर्व राज्यपाल महामहिम बंडारू दत्तात्रेय ने बादल की कार्यों की प्रशंसा करते हुए एक प्रशस्ति पत्र भी जारी किया है, जिसमें उनकी खींची गयी तस्वीरों की प्रशंसा की गयी है। 

प्रकाश बादल हिमाचल प्रदेश वन विभाग में शिमला में कार्यरत हैं और ऊपरी शिमला के छोटे से गांव जुब्बल से सम्बन्ध रखते हैं। बादल को मिली मानद उपाधि से प्रदेश का नाम रौशन हुआ है। यह उपाधि 18’ जनवरी को देश विदेश के अनेक विद्वानों को, विभिन्न क्षेत्रों में अभूतपूर्व योगदान के लिए विभिन्न नामी  हस्तियों की उपस्थिति में प्रदान की गयी। इस अवसर पर अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे जिसमें मुख्य रूप से योगेन्द्र चंदोलिया सांसद, स्वामी चक्रपाणी जी महाराज, अध्यक्ष हिन्दू महासभा बिरला मंदिर दिल्ली, स्वामी चन्द्र देव जी महाराज संस्थापक एवं अध्यक्ष ग्लोबल संत समाज कलयाण फाउंडेशन, श्री मति पुष्पा जिंदल, प्रसिद्ध समाजसेवी एवं शिक्षाविद, डॉ. हरिंद्र गर्ग निर्माता निदेशक दिल्ली दूरदर्शन, मरियम जन्नत, प्रसिद्ध युद्यमी, वाधवान ग्रुप के संस्थापक कमल बाधवान और निदेशक मनीष गुप्ता सहित अनेक गणमाननीय व्यक्ति उपस्तिथ थे।

Friday, September 20, 2024

मुख्यमंत्री सुक्खू द्वारा अजय पराशर द्वारा लिखित दो पुस्तकों का विमोचन

No. 640/2024-PUB19th September 2024

एक पुस्तक में है पीठ का इतिहास और दूसरी में है साहित्य संकलन 


शिमला
: 19 सितंबर 2024: (मीडिया लिंक//कार्तिका कल्याणी सिंह//देवभूमि स्क्रीन डेस्क)::

मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने आज यहां सूचना एवं जन सम्पर्क, उत्तर पूर्व परिषद्, के निदेशक अजय पराशर द्वारा लिखित दो पुस्तकों ‘जालंधर पीठ का रहस्य’ और ‘मुश्तरका खाता’ का विमोचन किया।

जालंधर पीठ का रहस्य इस पीठ  रहस्यों को  बहुत अदभुत  जानकारी उपलब्ध होती है। इस पीठ पर इस तरह के साहित्य की आवश्यकता बहुत  महसूस भी की जा रही थी। धार्मिक साहित्य लिखा भी बहुत गया है लेकिन खोज पूर्ण धार्मिक साहित्य की कमी अभी अभी अखरती है। इस तरह यह पुस्तक इस संबंध में काफी योगदान देती है।  

मुख्यमंत्री ने इन पुस्तकों के संकलन में लेखक के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ‘जालंधर पीठ का रहस्य’ पाठकों का हिमाचल प्रदेश की विभिन्न पीठों के ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्त्व के बारे में ज्ञानवर्धन करेगी। 

अजय प्रेशर साहिब की दूसरी पुस्तक ‘मुश्तरका खाता’  काफी योगदान देती है। वास्तव में यह पुस्तक रोजमर्रा की जिन्दगी के विभिन्न आयामों को दर्शाती 16 लघु कहानियों का संग्रह है, जो स्थानीय संस्कृति एवं इतिहास की समझ बढ़ाने में महत्त्वपूर्ण साबित होगी। यह कहानियां ज़िंदगी के विभिन्न रंगों और आयामों को दर्शाती हुई कलम के ज़रिए हमें ज़िन्दगी के रूबरू करती हैं। 

खोजी लेखक अजय पराशर ने विमोचन एवं उत्साहवर्धन के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया।  क्षेत्रों ने भी इन पुस्तकों  का स्वागत। .0.

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Thursday, September 5, 2024

HP: शिक्षक दिवस पर राज्यपाल ने दिए 27 शिक्षकों को राज्य पुरस्कार

एक शिक्षक को राष्ट्रीय पुरस्कार से किया सम्मानित 


शिमला: 5 सितम्बर 2024: (कार्तिका सिंह//देवभूमि स्क्रीन डेस्क)::

शिक्षक दिवस पर इस बार भी देश भर में विशेष आयोजन हुए। हिमाचल प्रदेश में भी इसी आश्य के कार्यक्रम अलग अलग स्थानों पर हुए। राज्य स्तरीय आयोजन शिमला में हुआ जिसमें शिक्षकों का सम्मान विशेष आकर्षण था। इस मौके पर राष्ट्र निर्माण में अध्यापकों, अभिभावकों व विद्यार्थियों की महत्त्वपूर्ण भूमिका पर भी विस्तार से प्रकाश डाला गया। 

शिक्षक दिवस के अवसर पर राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने आज राजभवन में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में 27 अध्यापकों को राज्य पुरस्कार और एक अध्यापक को राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया। यह पुरस्कार वर्ष 2023 के लिए शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रदान किए गए। इस अवसर पर लेडी गवर्नर जानकी शुक्ला ने सभी पुरस्कृत अध्यापकों को पौधें भी भेंट किए।

भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती को देशभर में शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर पर राज्यपाल ने उन्हें श्रद्धांजलि  देते हुए कहा कि डॉ. राधाकृष्णन एक कुशल प्रशासक, कर्मठ राजनेता, महान शिक्षक और सत्यनिष्ठ व्यक्तित्व के धनी थे।

इस अवसर पर शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित अध्यापकों को बधाई देते हुए राज्यपाल ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में अध्यापकों, अभिभावकों और विद्यार्थियों की भूमिका महत्त्वपूर्ण है। अध्यापकों को समाज के सभी वर्गों के प्रति संवेदनशील होने की आवश्यकता है जिससे शिक्षण और सीखने की प्रक्रिया और अधिक प्रभावी होगी। उन्होंने कहा कि एक मजबूत राष्ट्र के निर्माण के लिए प्रतिबद्धता से कार्य करने की आवश्यकता है और युवाओं की सक्रिय भागीदारी से इसे साकार किया जा सकता है।

राज्यपाल ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 (एनईपी) में भी राष्ट्र निर्माता के रूप में अध्यापकों के महत्त्व के बारे में बताया गया है। इस नीति में शिक्षकों के प्रति सम्मान की भावना को बढ़ाने के लिए अनेक प्रावधान किए गए हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल ने सदैव ही शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन किया है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में सुझाए गए सुधारों के अनुरूप हिमाचल इस दिशा में बेहतर कार्य करेगा।

श्री शुक्ल ने कहा कि भारत सरकार ने ‘पीएमश्री’ योजना को भी स्वीकृति प्रदान की है। इस योजना के अंतर्गत पहले से स्थापित विद्यालयों को सुदृढ़ीकरण कर ‘पीएम स्कूल फॉर राइजिंग इण्डिया’ के रूप में स्थापित करने का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि यह विद्यालय एनईपी का सफल क्रियान्वयन सुनिश्चित कर, अन्य स्कूलों के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण पेश करेंगे। उन्होंने कहा कि इस योजना के अंतर्गत प्रदेश के 180 विद्यालय विकसित किए जाएंगे। भारत सरकार ने 6 राज्यों में से हिमाचल को चुनकर स्टार परियोजना के अंतर्गत लाया है। इस योजना के अंतर्गत हिमाचल को 3 राज्यों सहित लाईट हाऊस के रूप में चुना गया है जोकि अन्य राज्यों के लिए मार्गदर्शक बनेंगे।

उन्होंने एक भारत-श्रेष्ठ भारत पहल पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि इस योजना के अंतर्गत विद्यार्थियों और अध्यापकों को विभिन्न राज्यों में शैक्षणिक भ्रमण करवाया जाता है और प्रदेश सरकार ने पहली बार प्रदेश के शिक्षकों का ज्ञानवर्धन करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय शैक्षणिक भ्रमण का आयोजन भी करवाया है।

नशे के प्रवृत्ति पर चिंता व्यक्त करते हुए राज्यपाल ने कहा कि वर्तमान में बहुत से युवा नशे के चुंगल में फंसे हुए हैं जो देश के उज्ज्वल भविष्य के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि नशे के विरुद्ध एक जन आन्दोलन शुरू करने की आवश्यकता है जिसके माध्यम से स्कूलों, महाविद्यालयों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों के विद्यार्थियों को नशे के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक किया जाएगा। अध्यापकों को नशे के दुष्प्रभावों के बारे में विद्यार्थियों को जागरूक करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए ताकि युवा समाज के समग्र विकास में अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर सकें। उन्होंने कहा कि शीघ्र ही जिला स्तर पर जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग और पंचायत प्रतिनिधियों के सहयोग से नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से सशक्त जागरूकता अभियान शुरू करेगा।

इस अवसर पर राज्यपाल ने एक स्मारिका का भी विमोचन भी किया।

शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने राज्यपाल और लेडी गर्वनर का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार शिक्षा क्षेत्र के विकास के लिए प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में सुधार करने के उद्देश्य से अनेक महत्त्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षक पुरस्कारों के लिए पारदर्शी नीति को अपनाया गया है जिसमें साक्षात्कार के साथ-साथ मूल्यांकन को भी शामिल किया गया ताकि योग्य शिक्षक को ही पुरस्कृत किया जाए। उन्होंने कहा कि युवाओं की शक्ति को सही दिशा देने की आवश्यकता है और शिक्षक इसमें महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री डॉ. यशवंत सिंह परमार ने शिक्षा क्षेत्र को विशेष अहमियत दी थी जिसे सभी सरकारों ने अपनाया। उन्होंने कहा कि सरकारी विद्यालयों में बच्चों का कम दाखिला चिंता का विषय है।

मुख्य संसदीय सचिव आशीष बुटेल ने कहा कि मुख्यमंत्री ने शिक्षा क्षेत्र में सुधार की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। बच्चों को लाभान्वित करने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में राजीव गांधी डे-बोर्डिंग स्कूल स्थापित कर रही है।

इससे पहले शिक्षा मंत्री ने राज्यपाल और मुख्य संसदीय सचिव ने लेडी गवर्नर को सम्मानित किया।

शिक्षा सचिव राकेश कंवर ने कहा कि शिक्षकों ने शिक्षा के क्षेत्र में अनुुकरणीय कार्य किए हैं।

प्रारम्भिक शिक्षा निदेशक आशीष कोहली ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।

इस अवसर पर राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला पोर्टमोर और राजकीय कन्या महाविद्यालय की छात्राओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए।

नगर निगम शिमला के महापौर सुरेंद्र चौहान, उप-महापौर उमा कौशल, राज्यपाल के सचिव सी.पी.वर्मा, उच्च शिक्षा निदेशक अमरजीत शर्मा, समग्र शिक्षा अभियान के राज्य परियोजना निदेशक राजेश शर्मा और अन्य गणमान्य व्यक्ति इस अवसर पर उपस्थित रहे।

कुल मिलाकर यह एक यादगारी आयोजन रहा। जिसकी संगीतमय सुरेन देर  देती रहेंगी। इस बार के रंगारंग सचमुच यादगारी था। 

Saturday, August 3, 2024

राजकीय महाविद्यालय के छात्र/छात्राओं की निबन्ध तथा भाषण प्रतियोगिता

Saturday 3rd August 2024 at 4:05 PM

हिमाचल कला, संस्कृति भाषा अकादमी की पहल से हुआ आयोजन 


शिमला
: 03 अगस्त 2024: (के के सिंह//देवभूमि स्क्रीन डेस्क):: 

हिमाचल निर्माता डाॅ. यशवन्त सिंह परमार की राज्य स्तरीय जयंती के अवसर पर हिमाचल कला, संस्कृति एवं भाषा अकादमी द्वारा 3 अगस्त, 2024 को गेयटी थिएटर शिमला में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के विद्यार्थियों की निबन्ध प्रतियोगिता तथा राजकीय महाविद्यालय के छात्र/छात्राओं की भाषण प्रतियोगिता करवाई गई। निबन्ध लेखन में 18 विद्यालयों के 36 विद्यार्थियों ने और भाषण प्रतियोगिता में 13 महाविद्यालयों के 25 छात्र/छात्राओं ने भाग लिया। दोनों प्रतियोगिताओं के मूल्यांकन के लिए प्रदेश के छः जाने-माने विद्वान डाॅ. अशोेक गौतम, डाॅ. सत्यनारायण स्नेही, डाॅ. कुंवर दिनेश सिंह, डाॅ. आत्मा रंजन, डाॅ. दिनेश शर्मा और डाॅ. वीरेन्द्र शर्मा निर्णायक के रूप में उपस्थित रहे।

भाषण प्रतियोगिता में राजकीय महाविद्यालय तुंगेश की छात्रा कुमारी गुंजन शर्मा ने प्रथम स्थान, राजकीय कन्या महाविद्यालय शिमला की छात्रा कुमारी मीनाक्षी ने द्वितीय और हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के छात्र अजय शर्मा ने तृतीय स्थान प्राप्त किया तथा निबन्ध लेखन प्रतियोगिता में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय भौंट की छात्रा कुमारी मन्नत ठाकुर ने प्रथम स्थान, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय मैहली की छात्रा स्नेहा ने द्वितीय और राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय चियोग की छात्रा आस्था ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। 

 सचिव अकादमी एवं निदेशक भाषा एवं संस्कृति विभाग, डाॅ. पंकज ललित ने इस अवसर पर प्रतियोगिता में भाग लेने वाले राजकीय महाविद्यालयों तथा राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों के विद्यार्थियों में से प्रथम, द्वितीय तथा तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को स्मृति चिह्न भेंट कर पुरस्कृत किया। कार्यक्रम का संचालन हिमाचल कला, संस्कृति एवं भाषा अकादमी की सहायक सचिव डाॅ. श्यामा वर्मा ने किया। 

डाॅ. पंकज ललित ने अपने प्रभावशाली भाषण से विद्यार्थियों को ऐसी प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए प्रेरित किया और प्रतियोगिता में विद्यार्थियों के प्रदर्शन की सराहना करते हुए बच्चों का उत्साहवर्द्धन किया। कार्यक्रम में भाषा एवं संस्कृति विभाग के संयुक्त निदेशक श्री मनजीत शर्मा, विभाग की उपनिदेशक कुसुम संघाईक, गेयटी प्रबंधक श्री सुदर्शन शर्मा, ज़िला भाषा अधिकारी अनिल हारटा और श्री संतोष पटियाल, दीपा शर्मा, अकादमी के अनुसंधान अधिकारी स्वतंत्र कौशल, श्री राकेश कुमार, श्रीमती दिव्या सूद और समस्त स्टाफ उपस्थित रहे।

डाॅ. ललित ने बताया कि दिनांक 4 अगस्त, 2024 को गेयटी थिएटर शिमला में डाॅ. परमार जयंती के अवसर पर साहित्यिक संगोष्ठी का आयोजन किया जाएगा जिसमें वरिष्ठ साहित्यकार श्री पी. सी. लोहमी अपना विषयपत्र प्रस्तुत करेंगे। इस अवसर पर प्रदेश के साहित्यकार अपने संस्मरण प्रस्तुत करेंगे और ज़िला सिरमौर के सांस्कृतिक दलों द्वारा लोक नृत्य प्रस्तुत किए जाएंगे।